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ज़ोया अख्तर की “लक बाय चांस ” अपनी शैली की सबसे प्रभावशाली फिल्मे में से है|

डेब्यू फिल्म के तौर पर ये ज़ोया अख्तर का बेहद साहसिक और ईमानदार प्रयास था और अब तक की उनकी तीनो फिल्म्स में से सबसे परिपक्व| सिल्वर स्क्रीन के परे जो सच्चाई , वास्तविकता और बदसूरती है , “लक बाय चांस” उसे बड़े खट्टे मीठे सलीके से लेकिन साथ ही साथ  फॉर्मूले से थोड़ी बचती हुई हमारे सामने लाती है| “लक बाय चांस” भी रीयलिस्टिक फिल्म के दायरें में आती है लेकिन ज़ोया अख्तर का रियलिस्म  उनके समकालीन डायरेक्टर्स मसलन अनुराग कश्यप से बिलकुल भिन्न है|
कश्यप का रियलिस्म ज़रा क्रूड है वहीँ अख्तर का रियलिस्म गुदगुदाता है|

बहरहाल इस पोस्ट मे मैं खासतौर पर “लक बाय चांस” के ओपनिंग क्रेडिट्स के बारे में सबका ध्यान आकर्षित करुँगी | हिंदी सिनेमा में बेहद चुनिंदा फिल्म्स होंगी जो ओपनिंग क्रेडिट्स को लेकर अपना अलग स्थान रखती हैं और उनमें से यह फिल्म  सबसे ऊपर है|
फिल्म शुरू होती है “यह ज़िन्दगी भी” गीत से और ये ही गीत फिल्म की आत्मा का प्रवेशद्वार भी है | रियल कैरक्टर्स और रियल लोकेशंस पे फिल्माया यह गीत परदे के पीछे के कलाकारों को सलाम है| परदे के पीछे से होते हुए ,परदे के ऊपर चमकते सिनेमा कितनी ज़िन्दिगियों को छूता है , उसका लुभावना चित्रण|

ऐसा हुआ हो की हम फिल्म देखते हुए इस गीत की संगीनता को अनदेखा किये हों इसलिए इसपर ज्यादा लिखने से बेहतर होगा , इसे फिर से देखना| साथ में ज़रूर देखिये ज़ोया अख्तर का ख़ास इंटरव्यू इस ओपनिंग क्रेडिट के बारे में|

साथ ही हमसे शेयर करिये हिंदी सिनेमा के अन्य बेहतरीन ओपनिंग सीक्वेंस के बारे में|

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