2003 में बना संगीत एलबम ‘संवेदना’, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं और गज़ल सम्राट जगजीत सिंह के संगीत का अद्वितीय संगम है।इस एल्बम में कुल 6 गीत हैं।

गीत “क्या खोया क्या पाया” इस संग्रह का कवर था, जिसके वीडियो को निर्देशित किया था यश चोपड़ा ने, शाहरुख खान द्वारा अभिनीत और गीत-स्वर जगजीत सिंह ने दिया था। गीत की प्रस्तावना जावेद अख्तर ने लिखी थी और आवाज़ दी थी अमिताभ बच्चन ने।

यह वीडियो अपने-अपने क्षेत्रों के बेजोड़ कलाकारों की ओर से कवि अटल जी को सम्मानपूवर्क भेंट थी। यश चोपड़ा का वही खूबसूरत निर्देशन, प्रकृति को ‘मेटाफर’ की तरह शामिल करने की कला , शाहरुख खान का खास अंदाज़ और जगजीत सिंह की समय ठहरा देने वाली आवाज़ मिलकर इस गीत को बेमिसाल बना देते हैं। इसी साल यश जी और खान साहब की ‘वीर ज़ारा’ आई थी और उनके इस काम में भी उसका बहुत प्रभाव दिखता है। शाहरुख कभी पहले इस अंदाज़ में दिखे नही थे।

पूरे वीडियो में अटल जी परछाई की तरह साथ दिखते है। “क्या खोया क्या पाया” इस वर्षों पुरानी पृथवी पर जीवन के अनंत होने के साथ ही जीवन के अंतिम सत्य को गरिमा के साथ अपनाने की बात करती है। किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का ये गीत देख-सुन कर आँखें नम करना स्वाभिक है।

इस कविता के साथ श्री वाजपेयी जी को अंतिम विदाई 🙏🏻💐

“क्या खोया, क्या पाया जग में,

मिलते और बिछड़ते मग में,

मुझे किसी से नहीं शिकायत,

यद्यपि छला गया पग-पग में,

एक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें।

पृथिवी लाखों वर्ष पुरानी,

जीवन एक अनन्त कहानी

पर तन की अपनी सीमाएं

यद्यपि सौ शरदों की वाणी,

इतना काफी है अंतिम दस्तक पर खुद दरवाजा खोलें।

जन्म-मरण का अविरत फेरा,

जीवन बंजारों का डेरा,

आज यहां, कल कहां कूच है,

कौन जानता, किधर सवेरा,

अंधियारा आकाश असीमित, प्राणों के पंखों को तौलें।

अपने ही मन से कुछ बोलें!”

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